उनका बयान दिखाता है कि सैनिकों और भारतीय सेना ने पुराने हथियारों और कम गोला-बारूद के बावजूद संघर्ष या युद्ध में सफलता प्राप्त की। हालांकि भारत सरकार कुछ मामलों में सफल नहीं हो पाई, लेकिन हम कुछ बिंदुओं को बताते हैं जो हमारे बयान को समझाने या समर्थन देने में मदद कर सकते हैं:
- सैनिकों और भारतीय सेना ने कठिन परिस्थितियों में अद्भुत वीरता, साहस और समर्पण दिखाया।
- भारतीय सेना ने सैन्य रणनीतियों और ऑपरेशनों को अच्छे तरीके से अंजाम दिया।
- पूरे संघर्ष के दौरान सैनिकों ने लचीलापन और दृढ़ संकल्प दिखाया।
- भारतीय सशस्त्र बलों ने अपने मिशनों को पूरा करने में शानदार टीम वर्क और समन्वय का प्रदर्शन किया।
- सैनिकों ने युद्ध की स्थिति में उच्च स्तर की पेशेवरता और कौशल दिखाया।
- सेना ने देश की सीमाओं और संप्रभुता की अच्छी तरह से रक्षा की।
- सैनिकों ने देश और इसके लोगों के लिए महत्वपूर्ण बलिदान दिया।
- भारतीय सेना ने संघर्ष के दौरान खतरों और दुश्मनों को प्रभावी ढंग से नाकाम किया।
- सेना ने महत्वपूर्ण उद्देश्यों और क्षेत्रों को सुरक्षित किया।
- सैनिकों ने राष्ट्र और उसके मूल्यों के प्रति अपनी निष्ठा और वफादारी दिखाई।
- भारतीय सेना ने उपलब्ध संसाधनों और उपकरणों का कुशलतापूर्वक उपयोग किया।
- सैनिकों ने भारतीय सशस्त्र बलों की इज्जत और प्रतिष्ठा को बनाए रखा।
- सेना ने आक्रामक और रक्षात्मक दोनों अभियानों में प्रभावी ढंग से काम किया।
- सैनिकों ने पूरे संघर्ष के दौरान पेशेवरता और ईमानदारी से काम किया।
- भारतीय सेना ने दुश्मन के हमलों और घुसपैठों को सफलतापूर्वक नाकाम किया।
- सैनिकों की कर्तव्य और सेवा के प्रति प्रतिबद्धता प्रशंसा योग्य थी।
- भारतीय सेना के जवानों ने बदलती परिस्थितियों में जल्दी से अनुकूलन किया और सोच समझ कर काम किया।
- सेना के नेतृत्व ने ज़मीन पर सैनिकों को सही दिशा दिखाने और समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- सरकार की ओर से किसी भी कमी या विफलता के बावजूद, सैनिक और भारतीय सेना संघर्ष में विजयी हुए।
- पं. नेहरू की सरकार ने युद्ध में हार मानी और इतिहास में राजनीतिक नेतृत्व पर कई आरोप लगाए गए हैं।
- सेना के कमांडरों को सरकार का अलिखित आदेश दिया गया कि इस युद्ध को ज्यादा प्रसारित करने की जरूरत नहीं है क्योंकि भारत ने इस युद्ध में हार का सामना करना पड़ा है। बहादुरी का ज्यादा शोर मचाने की जरूरत नही है और ज्यादा तगमें भी बांटने की जरूरत नहीं है। इसके परिणामस्वरूप रेजांगला युद्ध के वीर शहीदों के शौर्य के पराक्रम को कम दिखाया गया।
