1962 में चीन के साथ संघर्ष के दौरान भारत का समर्थन
करने वाली बाहरी शक्तियाँ:
संयुक्त राज्य अमेरिका: अमेरिका ने भारत को समर्थन दिया और चीन की आक्रामकता से बचाने के लिए राजनयिक और सैन्य सहायता की पेशकश की।
ब्रिटेन (यूनाइटेड किंगडम): ब्रिटेन ने चीन की कार्रवाई की आलोचना की और भारत को शांतिपूर्ण समाधान के लिए राजनयिक समर्थन प्रदान किया।
सोवियत संघ: सोवियत संघ ने भारत का समर्थन किया और चीन के हमलों से निपटने में मदद के लिए राजनीतिक और सैन्य सहायता की पेशकश की।
कनाडा: कनाडा ने भारत के साथ एकजुटता दिखायी और चीन की सैन्य कार्रवाइयों की निंदा की, संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की बात की।
ऑस्ट्रेलिया: ऑस्ट्रेलिया ने भारत का समर्थन किया और चीन की आक्रामकता की आलोचना की, सीमा विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की अपील की।
जापान: जापान ने संघर्ष पर चिंता जताई और क्षेत्र में स्थिरता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की जरूरत पर जोर देते हुए भारत का समर्थन किया।
फ्रांस: फ्रांस ने चीन की आक्रामकता की निंदा की और संघर्ष को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के प्रयासों का समर्थन किया।
इंडोनेशिया: इंडोनेशिया ने भारत का समर्थन किया और भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के लिए सम्मान का आह्वान किया।
नेपाल: नेपाल ने भारत के साथ एकजुटता दिखायी और शांतिपूर्ण संबंधों के महत्व पर जोर देते हुए चीन की कार्रवाई की आलोचना की।
भूटान: भूटान ने भारत का समर्थन किया और सीमा विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की अपील की।
न्यूज़ीलैंड: न्यूजीलैंड ने भारत के साथ एकजुटता व्यक्त की और चीन की सैन्य कार्रवाइयों की आलोचना की, संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की बात की।
दक्षिण कोरिया: दक्षिण कोरिया ने भारत का समर्थन किया और क्षेत्र में तनाव के बढ़ने पर चिंता जताई।
इजराइल: इज़राइल ने भारत का समर्थन किया, राजनयिक मदद की पेशकश की और चीन की आक्रामकता की निंदा की, शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया।
पश्चिम जर्मनी: पश्चिम जर्मनी ने भारत का समर्थन किया और चीन की सैन्य कार्रवाइयों की आलोचना की, संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया।
इटली: इटली ने भारत के साथ एकजुटता दिखायी और चीन की आक्रामकता की निंदा की, सीमा विवाद के शांतिपूर्ण समाधान और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की बात की।
आंतरिक शक्तियाँ
भारतीय सशस्त्र बल: भारतीय सशस्त्र बलों ने चीनी आक्रामकता के सामने साहस और लचीलापन दिखाया और अपने क्षेत्र की रक्षा के लिए बहादुरी से लड़े।
भारतीय नागरिक: भारत के लोगों ने संघर्ष के दौरान सरकार और सशस्त्र बलों का समर्थन किया और एकजुटता का प्रदर्शन किया, राष्ट्रीय गौरव की भावना दिखाई।
राजनीतिक दल: भारत में विभिन्न राजनीतिक दल ने मतभेद भुलाकर सरकार के प्रयासों का समर्थन किया।
मीडिया: भारतीय मीडिया ने जनता को जानकारी दी, जनता की राय को आकार दिया और सरकार और सशस्त्र बलों को जवाबदेह बनाया।
राज्य सरकारें: राज्य सरकारों ने केंद्र सरकार को समर्थन दिया और चीनी घुसपैठ के खिलाफ रक्षा प्रयासों में संसाधनों का योगदान किया।
धार्मिक और सामुदायिक नेता: धार्मिक और सामुदायिक नेताओं ने समाज के विभिन्न वर्गों के बीच एकता और सहयोग को बढ़ावा दिया।
व्यावसायिक समुदाय: व्यापारिक समुदाय ने संघर्ष के दौरान सरकार और सशस्त्र बलों को संसाधन और समर्थन प्रदान किया।
बुद्धिजीवी और शिक्षाविद: बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों ने सरकार और जनता को संकट और इसके प्रभावों से निपटने के लिए सुझाव और जानकारी दी।
सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों का समर्थन: सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों ने संघर्ष के दौरान सशस्त्र बलों को विशेषज्ञता, मार्गदर्शन और समर्थन दिया।
ये बिंदु 1962 में चीन के साथ संघर्ष के दौरान भारत के समर्थन में उठाए गए कदमों को दर्शाते हैं, जो एकजुटता, एकता और सामूहिक प्रतिक्रिया का प्रदर्शन करते हैं।
“रेज़ांग ला के सैनिक उस संकल्प के साथ लड़े जिसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता।” – जनरल जे.एन. चौधरी
